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बीजापुर हमले का मास्टरमाइंड: कभी स्कूल नहीं गया लेकिन बोल्टता है अंग्रेजी, ताड़मेटला और झीरम घाटी हमले में भी इसी का एक हाथ था।

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रायपुरएक घंटा पहले

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हिड़मा की ये तस्वीर काफी पुरानी है। वर्ष 2016 में ये तस्वीर देश की खुफिया एजेंसी के हाथ लगी थी। अब हिड़मा कैसा दिखता है कोई नहीं जानता।

  • बीजापुर और सुकमा जिले से लगे जोनागुडा, टेकलगुड़ुम और जीरागांव में शनिवार को हुई मुठभेड़
  • पुलिस को खुफिया इनपुट मिला था कि हिड़मा अपने सैंकड़ों नक्सलियों के साथ इन गांवों में घूम रहा है, यह खुद पकड़े गए थे।

बीजापुर में शनिवार को हुई मुठभेड़ में अब तक 23 जवानों के शहीद होने की खबर है। इस हमले के पीछे का मास्टरमाइंड नक्सलियों की पीएलजीए बटालियन 1 कांडरर हिड़मा है। पुलिस को पिछले कुछ दिनों से बीजापुर और सुकमा जिले के जोनागुडा, टेकलगुड़ुम और जीरागांव में हिड़मा और सैंकड़ों की तादाद में नक्सलियों के जमा होने की खुफिया जानकारी मिल रही थी। राज्य की पुलिस ने हिड़मा को पकड़ने का मिशन लॉन्च किया।

खबर है कि हिड़मा ने अपने साथी नक्सलियों के साथ फोर्स पर LMG जैसे बंदूकों से छुपकर फायरिंग की।  इसमें युवा शहीद हो गए।

खबर है कि हिड़मा ने अपने साथी नक्सलियों के साथ फोर्स पर एलएमजी जैसे बंदूकों से छुपकर फायरिंग की। इसमें युवा शहीद हो गए।

शनिवार को डीआरजी, एसटीएफ और सीआरपीएफ के बहादुर जवान नक्सलींदरर हिड़मा के कोर एरिया में बदल गए। हिड़मा की बटालियन नंबर 1 आधुनिक हथियारों से लैस रहता है। हैवी फायरिंग में जवान फंस गए और 23 शहादतों का दुख अब प्रदेश झेल रहा है। हालांकि पुलिस का दावा है कि 12 से अधिक नक्सली भी मारे गए हैं। घटना के बाद मिले इनुपट साझा करते हुए बस्तर रेंज के आईजी सुदंरराज पी ने बताया कि हिड़मा की मौजूदगी की जानकारी हमें मिली थी। नक्सली 3 चाल में शव और घायल साथियों को लेकर भागे हैं। हिड़मा की खोज जारी है।

4 साल पहले हिड़मा को शुरू किया गया था
दंडकारण्य विशेष जोनल कमेटी का बड़ा नक्सल लीडर 4 साल पहले पुलिस की फायरिंग में घायल हो चुका है। हिड़मा पर 25 लाख रुपये का इनाम है और वो सुकमा में चला गया और प्रहार में घायल हो गया। हिड़मा बस्तर का रहने वाला इकलौता ऐसा आदिवासी है जो नक्सलियों की सबसे खूखार बटालियन को लीडर है। शेष सभी लीडर आंध्रप्रदेश मूल के हैं।

बड़ी वारदातों में हिड़मा का हाथ

रायपुर और बीजापुर में घायल जवानों का इलाज किया जा रहा है।  ये जवान शनिवार को हुई मुठभेड़ में घायल हुए हैं।

रायपुर और बीजापुर में घायल जवानों का इलाज किया जा रहा है। ये जवान शनिवार को हुई मुठभेड़ में घायल हुए हैं।

सुकमा के भेज्जी में हुए हमले के पीछे हिड़मा था, जिसमें सीआरपीएफ के 12 जवान शहीद हुए थे। साल 2013 में झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हुए हमले में भी हिड़मा शामिल थे, जिसमें 30 लोगों की हत्या कर दी गई थी जिसमें कांग्रेस के बड़े नेता शामिल थे। वर्ष 2010 में चिंतलनार के करीब ताड़मेटला में सीआरपीएफ के 76 जवानों की शहादत के पीछे भी हिड़मा ही माना जाता है।

अनपढ़ होने के बाद भी बोलता में फर्राटेदार अंग्रेजी है
हिड़मा का पूरा नाम मांडवी हिड़मा उर्फ ​​इमानुल पोडियन भीमा है। वह सुकमा जिले के जगरगुंडा इलाके के पुड़अती गांव का निवासी है। अनपढ़ होने को बावजूद वह न सिर्फ फ्राटेदार अंग्रेजी बोलता है, बल्कि कंप्यूटर का भी पता है। गुरिल्ला-वार में महारत के कारण ही उसे लोगुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की बटालियन एक कांडरर बनाया गया। उसने दो शादियों की हैं। इसकी पत्नियां भी नक्सल गतिविधियों में शामिल हैं। हिड़मा के तीन भाई भी हैं- मांडवी देवा और मांडवी शुक्ला, दोनों गांव में ही खेती करते हैं, जबकि तीसरे मांडवी नंदा गांव में नक्सलियों को पढ़ाता है। हिड़मा की बहन भीमे दोरनापाल में रहती है।

1 साल पहले भी 17 जवान शहीद

तस्वीर बीजापुर हमले में शहीद हुए जवान के पार्थिव शरीर को घर ग्राम भेजने के दौरान ली गई।

तस्वीर बीजापुर हमले में शहीद हुए जवान के पार्थिव शरीर को घर ग्राम भेजने के दौरान ली गई।

सुकमा जिले के कसालपाड़ के जंगलों में लगभग 1 साल पहले नक्सलियों और जवानों के बीच आमने-सामने की भीषण मुठभेड़ हुई। पांच घंटे की गोलाबारी में डीआरजी और एसटीएफ के 17 जवान शहीद हुए थे। उस वक्त सर्चिंग से लौटने वाली फोर्स को नक्सलियों ने कोराज डोंगरी के पास घेरा था।फोर्स तब भी नक्सली नेता हिड़मा को मारने गया था। एनआईए के डेटाबेस के मुताबिक हिड़मा की उम्र 51 साल के आस-पास बताई जाती है।

बस्तर से नक्सलवाद खत्म करने के लिए हिड़मा का खात्मा जरूरी है
शनिवार को हुई इस ताजा मुठभेड़ के बाद बीजापुर पुलिस की तरफ से एक बयान जारी किया गया। इस आधिकारिक बयान में कहा गया है कि कई सालों से दंडकारण्य विशेष जोनल कमेटी जो कि नक्सलियों का एक बड़ा संगठन है उसके पीएलजीए बटालियन नंबर 1 को परावर गोरिल्ला फोर्स के रूप में नक्सली इस्तेमाल करते हैं। हींडरर हिड़मा ही है। नक्सलियों की ये बटालियन लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करते हुए गांव वाले ही हत्या कर उन्हें डराने का काम करते हैं। अगर बस्त में नक्सल समस्या का समाधान करना हो तो बटालियन नंबर वन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करनी जरूरी है।

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