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निजी अस्पताल में स्पष्ट इलाज: एक तरफ कोरोना की मार, दूसरी ओर निजी अस्पतालों में स्पष्ट इलाज,

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भिलाईएक घंटा पहले

  • कॉपी लिस्ट
  • जिले में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है,
  • सरकारी अस्पतालो में बेड़ फुल हो रहे हैं,
  • निजी अस्पतालों में कोरोना का इलाज करना

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में कोरोना के रोगी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सरकारी अस्पताल कोरोना के मरीजों से भरे गए हैं। निजी अस्पतालों में इलाज करने वाले सबके बस की बात नहीं। क्योंकि यहाँ फीस इतनी है कि मरीज कोरोना से तो ठीक हो जाएगा। लेकिन उसकी माली हालत बिगड़ जाएगी।

बेकाबू कोरोना का संक्रमण
जिले में आए दिन बड़ी संख्या में कोरोनाटे मरीज मिल रहे हैं। अगर आप भी कोरोना की चपेट में आ गए हैं। और निजी अस्पताल में इलाज करवाना चाहते हैं तो जरा रेट लिस्ट पर नजर डालें। कहीं ऐसा ना हो कि आप निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले न पड़ें। कहीं पैसे देने के लिए संपत्ति गिरवी रखने की नौबत न आ जाए। रेट्रो लिस्ट पर अगर नजर डालेंगे तो आपको लगेगा कि आप इलाज कराने नहीं बल्कि किसी बड़े होटल में रहने जा रहे हैं।
निजी अस्पतालों में कोरोना का इलाज

NABH (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स) से मान्यता प्राप्त अस्पतालों की टैग लिस्ट

सामान्य विभाजित वार्ड 4000 रुपये प्रति दिन
आईसीयू प्रतिदिन 8500 रुपये
वेंटिलेटर 11000 रुपये प्रति दिन

NABH से अवैध मान्यता प्राप्त निजी अस्पताल की रेट्रो लिस्ट

सामान्य विभाजित वार्ड प्रति दिन 3500 रुपए
आईसीयू 7500 रुपये प्रति दिन
वेंटिलेटर 11000 रुपये प्रति दिन

सरकारी अस्पतालों में नि: शुल्क इलाज
सरकारी अस्पतालों में कोरोना का इलाज कराने पर एक रुपये भी देने की जरूरत नहीं है। सरकारी अस्पतालों में इसका उपचार मुफ्त में होता है। इतना ही नहीं बल्कि सुबह शाम खाने की भी व्यवस्था होती है। इसके भी पैसे नहीं लगते हैं। दवाईयां भी कोरोनाटे रोगियों को मुफ्त में दी जाती हैं। सरकारी अस्पताल के बदले में यदि आप निजी अस्पताल में उपचार करते हैं, तो उसका चार्ज देना होता है।
सरकारी सुविधा उपलब्ध अस्पताल

  • डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल, जुनवानी
  • जवाहर लाल नेहरू अस्पताल, सुपेला
  • जिला अस्पताल, दुर्ग
  • सीएम मेडिकल कॉलेज, पचांदुर
  • सीएचसी, ज़ियाट

प्राथमिक अस्पताल में कोरोना का इलाज

  • बीएसआर सुपरस्पेशलिटी अस्पताल
  • स्पर्श अस्पताल, सुपेला
  • मित्तल हॉस्पिटल, जुनवानी
  • शंकराचार्य अस्पताल
  • एसआर अस्पताल, चीझली
  • स्टील अस्पताल, दुर्ग
  • नवजीवन अस्पताल, चिखली
  • आई.एम.आई. अस्पताल, खुर्सीपार
  • वि.वि. अस्पताल, पद्मनाभपुर
  • वर्धमान अस्पताल, दुर्ग

सामाजिक कार्यकर्ता ममता शर्मा ने निजी अस्पतालों की गंध रेट्रो लिस्ट का विरोध किया है। उनका कहना है कि आम लोग तो निजी अस्पतालों में इलाज करते ही नहीं सकतें हैं। रेट्रो लिस्ट का निर्धारण करने वालों को सोचना चाहिए। बहुत स्पष्ट इलाज कराने के बाद तो अपना मकान व गाड़ी को बेचना ही पड़ जाएगा। सरकारी को निजी अस्पतालों की रेट्रो लिस्ट फाइनल करते समय हर वर्ग का ध्यान रखना चाहिए। किसी एक वर्ग को ध्यान में रखकर नहीं जाना चाहिए।
जिले में पिछले 24 घंटे में 995 नए मरीज मिले, 10 की मौत

दुर्ग में रविवार को 995 कोरोना मरीजों की पहचान हुई है। यहां पर सक्रिय केसों की संख्या 11550 पहुंच गई है। कोरोना के लगातार बढ़ते रोगियों ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। दुर्ग में कोरोना के हालात बेकाबू होते रहे हैं।

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