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किसान आंदोलन: छत्तीसगढ़ की बलिदानी माटी के बारे में दिल्ली छोड़ गए किसानों का जत्था, कल सिंघु बॉर्डर पहुंचेगी मिट्जीटी

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रायपुर24 मिनट पहले

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देशभर में किसानों ने मिट् टीटी सत्याग्रह शुरू किया था। इसकी शुरुआत 30 मार्च को गुजरात के दांडी से हुई थी।

  • यह मिट्टी सोनाखान, कॉनेल, बानार, तमोरा, दल्ली राजहरा और लाल खदान से लाई गई
  • रायपुर और बिलासपुर रेल्वे पर दिल्ली जाने वाले किसानों को सुपुर्द की गई मिट् टी

छत्तीसगढ़ की बलिदानी मिट् टीटी के बारे में किसानों का एक जत्था आज दिल्ली रवाना हो गया है। यह मिट् टी स्वतंत्रता संग्राम से लेकर प्रदेश में किसान-मजदूर आंदोलनों से जुड़े स्मारकों से जुटाई गई है। यह मिट् टीटी मंगलवार को सिंघु बॉर्डर पहुंचेगी। आंदोलनकारी किसान दिल्ली के सिंघु, गाजीपुर, टीकरी, शाहजहाँपुर और पलवल में केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में दिव्यांग किसानों का स्मारक बनाना चाहते हैं।

प्रदेश के चार महत्वपूर्ण स्थानों से मिट् टीटी रविवार को ही राजिम पहुंच गया था। आज सुबह राजिम स्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित सुंदर लाल शर्मा चौक में किसानों ने एक श्रद्धांजलि सभा की। इस दौरान अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष मदनलाल साहू, रेखूराम, कोमन ध्रुव, नंदू ध्रुव, मोहनलाल, ललित कुमार आदि ने मिट् टीटी सत्याग्रह में शामिल किसान नेताओं को लाल गमछा और लाल गुलाब देकर सम्मानित किया। वहां से किसानों का जत्था रायपुर के लिए रवाना हुआ। अभनपुर के तिगड्डा चौक पर हेमंत टंडन, दलबीर सिंह, पुनुराम, देवीसिंह ने अपना स्वागत किया।

रायपुर रेलवे स्टेशन पहुंचने पर आदिवासी भारत महासभा के संयोजक सौरा यादव, छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संचालक मंडल के सदस्यों जेश्वर जुगनू चन्द्राकर, गोविंद चन्द्राकर, वेगेन्द्र सोनबेर, राजेन्द्र पटेल, मनोज साहू, संजय चन्द्राकर, नारद साहू, मीतू, मिट्ठू आदि उपस्थित थे। जाने वाले जत्थे को विदा किया। इस दौरान किसानों ने कृषि कानूनों के विरोध में नारेबाजी भी की। ट्रेन के बिलासपुर पहुंचने पर श्याम मूरत कौशिक, सलीम काजी, अजय राय, अम्बिका कौशिक, राजदीप छाबड़ा, यूसुफ हुसैन, रज्जाक अली, राजेन्द्र कौशिक, डॉ। अशोक शिरोड़े ने लाल खदान की मिट् टीटी का कलश सौंपा। दिल्ली जाने वाले जत्थे में तेजराम विद्रोही, मूलचंद साहू, रतन गोंडने, रेखा गोंडाने, सरस्वती गोंडने शामिल हैं।

यहां से जुटाई गई एमएटी

शहीद वीर नारायण सिंह के जन्मभूमि सोनेखान, 1910 भूमकाल आंदोलन की भूमि भारानार बस्तर, 1920 नहर सत्याग्रह की भूमि कोनेल, 1930 के जंगल सत्याग्रह की भूमि तमोरा, 1977 में मजदूर आंदोलन और शहा गुहा नियोगी की भूमि दल्ली राजहरा, 1990 के किसान आंदोलन में विभाजन हुआ। हुए रमेश परिदा के स्मारक अभनपुर और 1990 में बिलासपुर के लाल खदान क्षेत्र में दिवंगत हुए दरशराम साहू और डॉ। पूर्णेन्दु घोष के स्मारक से यह मिट् टीटी सभाई गई है।

किसान नेताओं ने कहा, जारी रहेगा आंदोलन

सत्याग्रही जत्थे का नेतृत्व कर रहे तेजराम विद्रोही ने कहा, केंद्र सरकार के कथित कृषि सुधारों वाले तीन कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे आंदोलन को चार महीने हो गए। अब तक 300 से अधिक किसानों की जान जा चुकी है। सरकार के कानों पर अभी जूं नहीं उगेंगे। लेकिन हम कानूनों को वापस करते हुए बिना वापस नहीं लौटेंगे। आंदोलन जारी रहेगा।

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