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शौर्य का दीपक: नक्सली चारोंँ तरफ से गोलियां बरसा रहे थे, सब इंस्पेक्टर दीपक साथियों को बचाते रहे, तभी हुआ ब्लास्ट और बस्तर का वीर शहीद।

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जांजगीर / बीजापुर14 मिनट पहले

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  • बीजापुर के तरेम इलाके में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच शनिवार को हुई मुठभेड़ हुई थी
  • 23 जवानों के शहीद होने की खबर, इन सब इंस्पेक्टर के अलावा सीआरपीएफ के एक इंस्पेक्टर दिलीप भी शामिल

हम लोगों पर नक्सलियों ने फायरिंग कर दी थी। हैवी फायरिंग हो रही थी कुछ साथी घायल हुए, हमनें घायलों को बीच में रखा था और बाहरी घेरे में नक्सलियों की गोली का जवाब हम भी गोली से दे रहे थे। दीपक साहब लगातर जवानों को हैवी फायरिंग से घेरे से निकाल रहे थे। 4 से 5 जवानों की जान बचाते हुए वो आईईडी ब्लास्ट की चपेट में आ गए। इस ब्लास्ट की वजह से उनकी जान चली गई, वर्ना आज वो हमारे बीच हैं। ये बातें बीजापुर के तर्रेम में हुई नक्सली हमले के दौरान मौजूद एक जवान ने दैनिक भास्कर से कही।

रास्तों पर कहीं भी फायरिंग का जोखिम, ब्लास्ट का खतरा रहा लेकिन यूं ही दीपक सहयोगियों के संग मुस्कुराते दिखे थे।

बड़े हमले और नक्सलियों से घिरे होने के बाद भी दीपक का साहस उनके साथ था। वह पूरी दिलुरी से लड़ते रहे और जवानों की मदद भी करते रहे। बस्तर के इस वीर की आदत थी, नक्सलियों की मांद में घुसकर उनके ठिकाने तबाह करना और नक्सलियों को मुहतोड़ जवाब देना। दीपक जांजगीर जिले के ग्राम पिहरीद के रहने वाले थे। ६ सितंबर १ ९९ ० को जन्मक ने १६ सितंबर वर्ष २०१३ में पुलिस फोर्स झावाइन की थी। वो बीजापुर में पोस्टेड थे। नक्सलियों के जमावड़े के इनपुट पर तर्रेम के सकारात्मक इलाके में सर्चिंग पर अपने साथी जवानों निकले थे।

जंगल के तौर तरीकों में दीपक खुद को ढाल चुके थे।  साथियों को भी अक्सर मुश्किल हालात में पॉजिटिव रहने को प्रेरित करते थे।

जंगल के तौर तरीकों में दीपक खुद को ढाल चुके थे। साथियों को भी अक्सर मुश्किल हालात में पॉजिटिव रहने को प्रेरित करते थे।

पिता ढूंढते रहे बेटे को, दूर गाँव में पड़ी मिली हरेक को
शनिवार को हुई नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में दीपक अपनी टीम को लीड कर रहे थे। फायरिंग के बाद जब जवान लौटे तो पता चला कि कुछ जवान लापता हैं। दीपक के घर वालों को भी यही जानकारी दी गई। उनके लापता होने की सूचना मिलने पर उनके पिता राधेलाल भारद्वाज, मां परमेश्वरी भारद्वाज बीजापुर के लिए रवाना हो गए। दोपहर तक दीपक का कुछ पता नहीं चला। बैकअप टीप तरम थाना क्षेत्र के जीवनागुड़ा इलाके में पहुंची तो दूर एक पेड़ के पास दीपक का शव मिला।

अंधरा सा लग रहा है सर ।।
दीपक के पिता पुत्र के शव से लिपट गए। आँखों से आंसू नहीं थम रहे थे। मुठभेड़ में शामिल जवान उन्हें हौसला देते रहे, लेकिन वह भी जानते थे कि पिता का दर्द उनके दिलासे के आगे कुछ नहीं। काफी देर बाद दीपक के पिता राधेलाल ने जांजगीर के पुलिस अधिकारियों से बात की। फोन पर उन्होंने कहा- “होली के पहले बात हुई थी बेटा से, बोला था बहुत व्यस्तता अभी तक, इसलिए बात नहीं कर रही, मेरा बेटा बहुत अच्छा था सर, मैं तो बर्बाद हो गया सर, मेरा बेटा नहीं रहा, नक्सलियों ने मार दिया दी थीको, मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा सर .. एकदम अंधेरा-अंधेरा लग रहा है, नहीं बात कर पाऊंगा सर ज्यादा डर “

दीपक के परिवार और पूरे गांव में अब मातम का माहौल है।  परिवार से स्थानीय लोगों और अफसरों ने मिलकर हर तरह की मदद का भरोसा दिया है।

दीपक के परिवार और पूरे गांव में अब मातम का माहौल है। परिवार से स्थानीय लोगों और अफसरों ने मिलकर हर तरह की मदद का भरोसा दिया है।

2019 में हुई शादी, गाने और खेल का शौक था
दीपक के साथ नक्स मोर्चे पर तैनात जवानों ने बताया कि यहां की मुश्किल परिस्थितियों में रहने के बाद भी सभी ने हमेशा सब इंस्पेक्टर दीपक भारद्वाज को हंसते मुस्कुराते देखा। कई बार सर्चिंग के दौरान मीलों पैदल चलने के दौरान दीपक गाने गाकर साथियों का मन हल्का कर देते थे। स्कूल के समय में एक ब्रिलियंट स्टूडेंट रहा, उन्होंने कक्षा छठवीं से बारहवीं तक की पढ़ाई नवोदय विद्यालय मल्हार से पूरी की थी। उनके साथ पढ़ाई करने वाले राहुल भारद्वाज ने बताया कि दीपक पढ़ाई में होशियार तो थे ही। उनका फोकस खेल व सिंगिंग में भी था। वे बास्केटबॉल बॉल के अच्छे खिलाड़ी थे। उन्होंेने स्कूल स्तर पर नेशनल लेवल की प्रतियोगिता खेली थी। वे अच्छे सिंगर भी थे। 2019 में दीपक की शादी हुई थी।

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