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कोरोना वैक्सीनेशन: अधिकांश बुजुर्गों ने लगवाए टीके, उसमें कोरोना का संक्रमण काफी कम है

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रायपुर2 मिनट पहले

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राजधानी की 86 साल की बुजुर्ग राधारानी शर्मा ने टीका लगाया।

  • जिन्होंने डोज लगवाए हैं, उन्हें अंबाडी तैयार है इसलिए अब वही सुरक्षित हैं

राजधानी में 60 साल या उससे अधिक के 1.10 लाख से ज्यादा बुजुर्गों ने कोरोना वैक्सीन लगवाई है और कुछ दिन पहले तक दोनों डोज ले चुके हैं। पूरे जिले में 3.30 लाख बुजुर्गों को कोरोना टीके लगने हैं, लेकिन शहरी इलाके में बमुश्किल 45 हजार बुजुर्गों को हीoc अब तक नहीं लगाया गया है, या फिर पहले डोज के लिए उनका एक-दो दिन में नंबर आ जाएगा। कोरोना का केक किस तरह प्रभावी रहा है, इसके अंजाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि बुजुर्गों में संक्रमण इस बुरे दौर में भी कम रहा है और तबियत खराब होने के बावजूद टेस्ट में वे निगेटिव आ रहे हैं।

रायपुर में 31 मार्च से 3 अप्रैल तक रोजाना कोरोना केसेज के पिछले रिकॉर्ड टूटे हैं। इन चार दिनों में सिर्फ राजधानी में 6300 केस मिले हैं। रविवार को इसमें शामिल होने की संख्या लगभग साढ़े 7 हजार हो जाएगी, लेकिन इस एक दिन का आयु आधारित वर्गीकरण अभी उपलब्ध नहीं है। चार दिन के मामलों पर नजर डालें तो जितने केस मिले हैं, उनमें से बुजुर्ग महज 10 प्रतिशत ही हैं। ये भी ज्यादातर वो हैं, जिन्हें किसी कारण से टीका नहीं लग पाया था। बचे लोगों में एकाध ही हैं जो दोनों डोज के बाद पजितिव आए हैं।

रायपुर में 31 मार्च से 3 अप्रैल के बीच 6 हजार 300 से ज्यादा केस मिले हैं। लेकिन इसमें ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि 60 साल से अधिक उम्र की आबादी के कोरोना मामलों में स्पष्ट कमी नजर आने लगी है। पिछले 4 दिन के ही मामलों का गहराई से विश्लेषण करें तो कुल 6300 मामलों में से नए बुजुर्ग बुजुर्ग 662 ही हैं। यानी, कोरोना के कुल मामलों में यह प्रतिशत 10.5 रह गया है। पिछले पीक के समय यह अनुपात 22 प्रतिशत से अधिक था।

ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि अभी तक राजधानी में बुजुर्गों का टीकाकरण ही सबसे हो चुका है। इसके ठीक उलट, नए संक्रमण का सबसे ज्यादा शिकार युवा हो रहे हैं, जिन्हें टीके नहीं के बराबर लगे हैं। केवल चार दिन में मिले केस का अध्ययन किया गया तो 20 से 40 साल की उम्र वाले स्वभावों की संख्या 4990 है। यानी ताजा आउटब्रेक में युवाओं के अस्थिर होने की दर 79.20 प्रतिशत अा रही है, जो बहुत अधिक कह सकते हैं। 27 लाख वैक्सीनेशन की तुलना में एडवर्स इफेक्ट या कोरोना पॉजिटिव होने के मामले भी न के बराबर हैं।
इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि टीके से सुरक्षा कवच अब तैयार हो रही है।

^ बुजुर्गों को टीके पूरी तरह लग जाते हैं, इसका ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। टीके की कमी न हो, इसका खयाल रख रहे हैं लेकिन मामला सप्लाई पर निर्भर है। बुजुर्गों को काफी संख्या में टीके लगे हैं और उसका प्रभाव नजर अाने लगा है।
डॉ। अमरसिंह ठाकुर, राजकीयकरण अधिकारी

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