Harshit India news

breaking news | Bhopal local news | Madhya Pradesh news | Indore news

पहाड़ मंदिर की 501 सीढ़ियां चढ़-उतर कर की प्रैक्टिस: 22 साल की याशी 6 को शुरू करेंगी एवरेस्ट की चढ़ाई, सफल हुईं तो ऐसी करने वाली प्रदेश की पहली बेटी

बर्फीले पहाड़ों के बीच याशी।

राज्य की 22 साल की याशी जैन दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह करने के लिए नेपाल पहुंच चुकी हैं। मंगलवार 6 अप्रैल से वे एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू करेंगे। अगर 6 काे मौसम खराब हो रहा है तो 7 या 8 काे सफर की शुरुआत करेंगी। अगर वे एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने में कामयाब हो जाते हैं तो ऐसी करने वाली छत्तीसगढ़ की पहली बेटी होगी।

अब तक राज्य से सिर्फ राहुल गुप्ता ऐसा कर सकते हैं। हाल ही में सखी फाउंडेशन की ओर से साइंस कॉलेज ऑडिटोरियम में रखे गए समारोह में याशी का सम्मान किया गया। वे मूलरूप से रायगढ़ की रहने वाली है। याशी ने सिटी भास्कर से खास बातचीत में अपनी तैयारियों की जानकारी दी। पढ़िए उन्हीं के शब्दों में-

रोज 30 किलोमीटर साइकिलिंग, ढाई घंटे योगा-जिमिंग, मेडिटेशन भी

अरुणिमा सिन्हा की कहानी से मैं काफी प्रभावित हुई। मुझे चुनाैयर्स स्वीकारना पसंद है। अरुणिमा की कहानी सुनने के बाद मैंने किसी कंपनी में जाब करने के बजाय पर्वताराही बनने का डिसीजन लिया। एवरेस्ट फतह के लिए पिछलेे तीन साल से तैयारी कर रही है। पूरी उम्मीद है कि ये सपना जरूर सच हाेगा। मार्च 2020 में जब लॉकडाउन लगा, तब भी प्रैक्टिस जारी रखा गया। एवरेस्ट के लिए शरीर मजबूत बनाने की रोज 30 किलोमीटर साइकिलिंग, एक घंटे योगा और डेढ़ घंटे जिमिंग करती हूं। माइंड कंट्रोल और ब्रीदिंग एक्सरसाइज पर विशेष ध्यान देता है। एवरेस्ट की चढ़ाई के दौरान हर पर्वतारोही आमतौर पर पीठ पर 15 से 18 किलो वजनी बैग लेकर चढ़ता है, जिसमें पानी की बोतल, जैकेट और फूडपैक होते हैं। इसके लिए खुद को तैयार करने वाला पिछले छह महीने से हर दूसरे दिन रायगढ़ के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर की 501 सीढ़ियों में 20 किलो वजनी बैग लेकर चढ़ती और उतरती हूं। इस मंदिर को लोग पहाड़ मंदिर के नाम से जानते हैं। मुझे भी पहाड़ ही तो चढ़ना है। हनुमान जी के मंदिर की सीढ़ियां मुझे एवरेस्ट चढ़ने के काबिल बना रही हैं। जिस बैग को वापस पर रखकर पहाड़ मंदिर पर चढ़ने की प्रैक्टिस करती हूं उसमें 7 किलो एंकल वेट, दो से तीन किलो की जैकेट और पानी की बोतल में रेत भरकर रखती है। पूरा विश्वास है, ये मेहनत जल्द ही रंग लाएगी। अपने प्रोजेक्ट का नाम जानकी रखा है। जल, जंगल, जमीन के साथ ही जानकी यानी बेटियों की सुरक्षा का मैसेज देने का मकसद है। अागे मेरा लक्ष्य कुछ सालाें के बाद लड़कियों के लिए प्रशिक्षण केंद्र शुरू करना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लड़कियां पर्वतारोही बन सकें। याशी कहती हैं कि उनके मिशन में परिवार के साथ हजारों लोगों की दुआ और प्रशंसा की भी बड़ी भूमिका रही है। -आयाशी जैन

तीन साल में ऐसे उठे गए याशी का हौसला

  • याशी लगभग एक महीने तक एवरेस्ट के आसपास रहेंगी। वे मई में वापस लौटेंगी।
  • पल पासआउट याशी मई 2018 में उत्तराखंड के पहाड़ पर जोगिन की चढ़ाई कर रहे हैं।
  • जुलाई 2019 में वे यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस फतह कर चुके हैं।
  • जनवरी 2020 में वे नेपाल की घुड़सवार द्वीप पीक की चढ़ाई कर चुके हैं। चढ़ के दौरान ऑक्सीजन लेवल कम हो गया था, लेकिन याशी ने हिम्मत नहीं हारी।

खबरें और भी हैं …

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: