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जंगलों में आग के बाद अब दीमक भी बनी हुई है।

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कांकेर4 घंटे पहले

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जंगल में पेड़ों को आग के अलावा दीमक से भी खतरा है।

जंगल में पेड़ों को आग के अलावा दीमक से भी खतरा है। जिले के जंगलों में बड़ी संख्या में पेड़ों में दीमक लग रही है। दीमक पेड़ों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा। खासकर ईच्छापुर मर्दापोटी के जंगलों में दीमक ने बड़ी संख्या में पेड़ों को नुकसान पहुंचाया है।

दीमक लगने से कुछ ही समय में हरे भरे पेड़ सूख जाते हैं। दीमक की वजह से प्रतिवर्ष जंगल में हरे भरे पेड़ों को नुकसान पहुंच रहा है। बचाव के लिए वनविभाग कोई उपाय नहीं कर रहा है। ग्राम ईच्छापुर, मर्दापोटी के जंगलों में बड़ी संख्या में पेड़ों को दीमक से नुकसान नजर आ रहा है।

कई पेड़ सूखकर खोखला होकर नष्ट हो गए हैं। शहर के भंडारीपारा, गोविंदपुर में भी कुछ हरे भरे पेड़ को दीमकॉलोला कर चुके हैं। पेड़ों पर दीमक अपनी परत बना लेते हैं। दीमक कछार मिट्टी वाले स्थान में ज्यादा होते हैं। खासकर कुसुम और महुआ के पेड़ में दीमक का प्रकोप ज्यादा होता है। जिला पंचायत सदस्य राजेश भास्कर ने कहा दीमक की वजह से मर्दापोटी में काफी सारे फलदार पेड़ों को नुकसान हुआ है।]पेड़ों को बचाने के लिए विभाग को ध्यान देना चाहिए।

रासायनिक घोल से दीमक का प्रकोप होता है

वनस्पति शास्त्र की सहायक प्राध्यापक आर कुलदीप के अनुसार दीमक लगने से पेड़ सूखने लगते हैं और कुछ समय में नष्ट हो जाते हैं। दीमक पेड़ों को जड़ से नुकसान पहुंचाते हैं। संरक्षण के लिए शुरूआती दौर में ही रासायनिक घोल डालने से दीमक का प्रकोप कम हो जाता है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े ग्रीनांडो विरेंद्र सिंह ने कहा कि कोस्क को बचाने के लिए वन विभाग को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। मर्दापोटी के साथ कच्चे क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में पेड़ों को दीमक ने शिकार बनाया है।

पौधे लगाते समय ध्यान दिया जाता है: डीएफओ

कांकेर डीएफओ अरविंग पीएम ने कहा जब नए पौधे लगाए जाते हैं तो केवल दीमक से बचाने रास्यानिक घोल डाला जाता है। दीमक सभी जगह पर नहीं लगता है। दीमक प्राकृतिक आपदा है।

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