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बेजुबान हो रहे शिकार: चीतल पर कुत्तों का हमला, तीन दिन में दो की मौत

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बिलपुर15 मिनट पहले

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बिलासपुर जिले में जंगल के जानवार पानी पीने के लिए रिहायशी क्षेत्रों की तरफ रुख कर रहे हैं। भरुवाडीह के बंधिया ताबाल में पानी पीने के लिए पहुंचें चीतल को कुत्तों ने मार डाला था

  • जंगलों में पानी की व्यवस्था न होने के कारण रिहायशी बस्तियों की तरफ रुख
  • पीने के पानी को तरस रहे हैं वन्य प्राणी, शहरों में आकर गंवा रहे हैं जान

बिलासपुर जिले के भरूवाडीह के बंधिया तालाब में पानी पीने का एक और चीतल की मौत हो गई है। कुत्तों ने तीन दिन में दो चीतलों पर हमला करके उन्हें मौत के घाट उतार दिया है।

चीतल पानी के लिए गवां रहे जान
सीपत सर्किल के जंगल मे फिर एक बार प्यासी मादा चीतल भटक कर गांव के करीब बंधिया तालाब में पानी पीने पहुंची, लेकिन पानी पीने से पहले ही कुत्तों ने हमला कर चीतल को मार डाला। इस सर्किल में तीन दिन में यह दूसरी बड़ी घटना है। जहां बिटुबान प्यासे पशु पानी पीने जंगल से भागकर बस्ती के करीब तालाब, नहर में पहुंच रहे हैं। और अपनी जान गंवा रहे हैं। अगर जंगल के अंदर उनके लिए पर्याप्त मात्रा में पीने के लिए पानी की व्यवस्था होती है, तो शायद इनको अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती। इसकी सूचना ग्रामीणों ने गांव के ही वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष प्यारेलाल बिंझवार को दी। प्यारेलाल ने मौके पर जाकर कुत्तों को भगाया और गम्भीर रूप से घायल चीतल को पानी पिलाने का प्रयास किया। इसके बाद समिति के अध्यक्ष ने घटना की सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी। अधिकारियों के निर्देश पर मेटाडोर वाहन से इलाज के लिए बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी ले जाया गया। जहां इलाज होने से पहले ही दोपहर 3:30 बजे घायल चीतल ने दम तोड़ दिया। वन विभाग के अधिकारियों ने पंचनामा कर पशु चिकित्सक से पोस्टमार्टम करा कर, चीतल का दाह संस्कार कर दिया।

जंगल मे पानी की कमी, तीन दिन में दो चीतलों की मौत

बढ़ती गर्मी का प्रकोप और जंगल में पानी की कमी से जंगली जानवरों की जान पर सामत बन आई है। हर साल प्यास की शिद्दत में जानवर जंगलों से निकलकर बस्ती के आसपास तालाब, नाला, नहर पहुंचते हैं। और पहले से वापस लगाकर बैठे बैठे शिकारी और कुत्तों के चंगुल में फंस जाते हैं। शिकारियों को शिकार करते पकड़े जाने पर मामले को मौके पर ही रफा-दफा कर दिया जाता है। लेकिन कुत्तों के हमलों से घटित घटना को कोई छुपाया जा सकता है। क्योंकि यह आम ग्रामीणों के बीच घटना होती है। भरुवाडीह की इस घटना से केवल तीन दिन पूर्व ही ठरकपुर के नहर में पानी पीने पहुंचे चीतल की भी मौत कुत्तों के काटने से हुई थी।

जिम्मेदार नहीं समझे अपनी जिम्मेदारी

बिलासपुर रेंजर ए.एस. नाथ का कहना है कि जंगल के सभी 9 बोर पॉइंट में मोटर पाइप लगा दिया गया है। इसे चालू करने के लिए केबल वायर की प्राप्ति की जाएगी। एक सप्ताह के अंदर सभी बोर चालू कर देंगे। साथ ही जमीन को खोदकर कोटना लगाया जाएगा। इसमें जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था की जाएगी। इसलिए जंगल से जानवर बाहर नहीं निकल सकते। जबकि सर्किल के डिप्टी रेंजर अजयने का कहना है कि 9 में से 5 बोर में पाइप लगा दिया गया है, लेकिन कनेक्शन वायर नहीं होने के कारण चालू नहीं हो पाया है। दोनों वन विभाग के अधिकारियों के बयान में अंतर हैं।

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