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सुरक्षित है वैक्सीन: राजधानी में 1.02 लाख लोगों को लगे टीके, केवल 120 लोगों में दिखे साइड इफेक्ट वह भी मामूली सा बुखार या हल्का बदन दर्द

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रायपुर7 घंटे पहले

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फाइल फोटो।

राजधानी में कोरोना वैक्सीनेशन की बाढ़ भले ही कुछ धीमी है, लेकिन एडवर्स इफेक्ट कमेटी (साइड इफेक्ट की मानीटरिंग कमेटी) की रिपोर्ट के मुताबिक जितने लोगों को टीके लगे, उनमें से केवल 0.05 फीसदी लोग ही साइड इफेक्ट नजर आए हैं। ये कोविशील्ड और कोविक्सीन, दोनों तरह के टीके हैं।

राजधानी में अब तक 1.02 लाख लोगों को दोनों तरह के टीको के लगभग दो डोज लग गए हैं और 120 लोगों ने टीके के बाद हल्के बुखार या बदन दर्द की शिकायत की थी, जो अधिकतम 24 घंटे में दूर भी हो गए हैं।

प्रदेश में 15 लाख लोगों को टीके लगे हैं, जिनमें सभी सहित 700 लोगों में ही साइड इफेक्ट नजर आए हैं। बढ़ते कोरोना संक्रमण की वजह से टीकाकरण जरूरी माना जाने लगा है, इस कारण से भी एडवर्स इफेक्ट कमेटी ने यह रिपोर्ट जारी की है, ताकि लोग आश्वस्त रहें कि कोविशील्ड या कोविक्सीन, दोनों ही पूरी तरह सुरक्षित हैं।

कोरोना वैक्सीन लगवाने के 36 से 72 घंटे के भीतर 8 मौतें रिपोर्ट हुई हैं। एडर्स इफेक्ट कमेटी के अलावा अलग-अलग स्तर पर इन सभी मामलों की जांच हो चुकी है और किसी भी मामले में मेडिकली या नैदानिकली यह प्रमाणित नहीं हो पाया कि मौत का कारण वैक्सीन था। पहले या सेकंडेक लगवाने के बाद अब तक आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक आधा दर्जन लोग कोरोनाटिक पाए गए हैं। इनमें भी पूंजी में केवल एक ही है, इसलिए माना जा रहा है कि जितने लोगों ने टीके लगवाए हैं, दो डोज के बाद उनमें से ज्यादातर में आंतबाड़ी बनना शुरू हो जाएगा।

साइड इफेक्ट्स नहीं के बराबर – डॉ। निर्मल वर्मा, प्रमुख-एडवर्स इफेक्ट कमेटी
ऐसे लोग जोके लगवाने के बाद प्रतिकूल प्रभाव की जद में आए हैं, उनकी तादाद 700-800 के ही लगभग है। प्रदेश में 15 लाख से ज्यादा टीकाकरण के आंकड़ों की तुलना में देखा जाए तो ये संख्या 0.05 प्रतिशत के करीब है। यानी पहली बात ये कि बिना किसी चिंता के टीका लगवा ही लें। प्रदेश में अभी तक कोविशील्ड वैक्सीन ही ज्यादा शुरू हुई हैं। इसलिए स्वाभाविक रूप से इसी के एडर्स इफेक्ट वाले मामले बहुत ज्यादा हैं। दरअसल वैक्सीन लगाने के बाद किसी भी व्यक्ति के शरीर मेंं कौन किस तरह की बनीगी, ये उस शख्स के शरीर पर करता है।

ऐसा नहीं है, वायरस में भी म्यूटेशन होता है। इसलिए अगर टीके के बाद कोई व्यक्ति नहीं हुआ तो इसका सीधा मतलब है कि उसके शरीर में दर्द सही तरीके से नहीं बन पाया। किसी भी टीके से 100 प्रतिशत प्रोटेक्शन कभी नहीं मिलता है, इसलिए एहतियात भी जरूरी है।

टीके के बाद गंभीर संक्रमण नहीं – डॉ। स्मित श्रीवास्तव, एचओडी-एसीआई
टीके और संक्रमण से सुरक्षा को स्वास्थ्य विज्ञान के नजरिए को समझना होगा। वैक्सीन लगाने के बाद हमारे शरीर में शरीर एक आर्मी की तरह काम करता है। कई बार आर्मी रिस्पॉंस नहीं कर पाती है, और संबंधित व्यक्ति पॉजिटिव आ जाता है। दरअसल, वैक्सीन सबसे पहली सुरक्षा इस बात की देती है कि संक्रमण अगर हुआ भी तो वह गंभीर श्रेणी का नहीं होगा। यानी मौत से बचाव तो हो जाएगा। मेरे दो रोगियों में से एक कोके लगवाने के बाद बुखार आया। ऐसा उसके साथ 5-6 दिन चला गया। मैंने उसे कोरोना जांच करवाने की सलाह दी, वो पॉजिटिव निकला।

इसी तरह एक और रोगी को भी 5-6 दिन के अंदर ही संक्रमण निकल गया। वितरण बनने में कम से 3 से 6 सप्ताह तक लग सकता है। दरअसल, टीके लगवाने के बाद कोमॉर्बिडिटी से मौत की आशंका भी बहुत कम हो जाती है, इसलिए जिनकी बारी आ रही है उनमेंoc जरूर लगवाना चाहिए।

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