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माओवादियों का शांतिवार्ता प्रस्ताव: छत्तीसगढ़ सरकार को चिट्ठी पर भरोसा नहीं, इष्टतम प्रस्ताव का इंतजार, बंदूकें छोड़ने की शर्त भी।

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रायपुर8 घंटे पहले

आंध्र प्रदेश में बढ़ते विकास पर माओवादियों ने 80 के दशक में बस्तर क्षेेत्र को अपने संगठन का आधार बनाया था। उनकी गतिविधियों की वजह से अलग राज्य बनने के बाद भी छत्तीसगढ़ का यह इलाका शांत नहीं हो पाया है।

  • सरकार के प्रवक्ता रवींद्र चौबे ने कहा-प्रस्ताव आया तो विचार करेंगे
  • एक दिन पहले माओवादियों के प्रवक्ता ने बातचीत का प्रस्ताव दिया था

छत्तीसगढ़ में माओवादियों ने सरकार के साथ शांतिवार्ता के लिए जो पत्र जारी किया था। उसपर सरकार को ही भरोसा नहीं है। सरकार के प्रवक्ता और प्रदेश के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने आज कहा, उस पत्र पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। वे सरकार को कोई प्रस्ताव दें तो तत्कालीन विचार किया जाएगा।

कृषि, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री रविंद्र चौबे ने आज कहा, अभी तक जो बातें सामने आई हैं। वह केवल कयास है कि ऐसी चिट्ठी नक्सलवादियों ने जारी की है। सरकार तक इस तरह का कोई प्रस्ताव नहीं आएगा उसके बाद ही बातचीत हो सकती है। कृषि मंत्री ने कहा, सरकार पहले भी कह चुकी है कि ऐसे किसी वार्ता के लिए सबसे पहले उन्हें येन छोड़ना होगा। केवल आगे की बात होगीगी। एक दिन पहले गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा था, उनके पास अभी तक पत्र नहीं पहुंचा है। पत्र मिलने पर मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद इस पर अगले कदम का फैसला लिया जाएगा।

एक दिन पहले भकपा माओवादी की दंडकारण्य वस्तु जोनल कमेटी के प्रवक्ता विकल्प की ओर से जारी पत्र में कहा गया है। जनता की भलाई के लिए वे सरकार के साथ बातचीत को तैयार हैं।

बातचीत के लिए माओवादियों की भी शर्त

सरकार के साथ बातचीत के लिए माओवादियों ने तीन प्रस्तावों प्रस्तावित की हैं। इन संघर्षरत क्षेत्रों से सशस्त्र बलों को वापस बुलाने, माओवादी संगठन पर लगे प्रतिबंध हटाने और उनके जेल में बंद प्रमुखों को रिहा करने की शर्त प्रमुख रूप से शामिल है। माओवादियों ने कहा है कि इसके बिना बातचीत का माहौल नहीं बनेगा।

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