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मलेरिया पर वार: छत्तीसगढ़ में पहली बार मलेरिया को बड़ी शिकस्त, प्रति एक हजार की आबादी में केवल 1.17 मरीज; पिछले 5 वर्षों में 4.4 अंक की गिरावट

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रायपुर15 मिनट पहले

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छत्तीसगढ़ मुक्त अभियान के तहत बस्तर-सरगुजा के अधिकांश मलेरिया क्षेत्रों में घर-घर जाकर लोगों के नमूने लिए जा रहे हैं।

  • एनुअल पैरासाइट्स इंसीडेंस रिपोर्ट में आए आंकड़े

छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद पहली बार मलेरिया को बड़ी शिकस्त मिली है। पिछले पांच वर्षों में मलेरिया की उपज तेजी से घटी है। हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से जारी एन यथार्थवादी पैरासाइट इंसीडेंस (एपीआई) में सामने आया है कि छत्तीसगढ़ की प्रति एक हजार की आबादी में केवल 1.17 लोग ही मलेरिया से पीड़ित हो रहे हैं। पांच साल पहले इसी रिपोर्ट में यह आंकड़ा 5.21 था।

छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय वर्ष 2000 में मलेरिया रोगियों का यह वार्षिक आंकड़ा प्रत्येक एक हजार की आबादी पर 16.8 था। वर्ष 2005 में यह 8 तक पहुंच गया। 5 साल बाद 2010 में 6.14 और 2015 में 5.21 था। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग इस आंकड़े को अपनी बड़ी जीत बता रहा है। अधिकारियों ने बताया कि मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के पहले चरण में बस्तर संभाग के सातों जिलों में घर-घर जाकर 14 लाख 6 हजार जांच हुई थी। इसमें 64 हजार 646 लोग मलेरिया की पुष्टि हुई थी। दूसरे चरण में 23 लाख 75 हजार और तीसरे चरण में 10 लाख 58 हजार लोगों की मलेरिया जांच की गई है। दूसरे चरण में 30 हजार 76 और तीसरे चरण में 14 हजार 828 लोगों को मलेरिया पीड़ित पाया गया। इनका तत्काल उपचार किया गया था।

इस अभियान की कामयाबी के बाद सरकार ने मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान शुरू किया। इसके तहत दिसंबर 2020 और जनवरी 2021 में बस्तर और सरगुजा संभाग के 2309 गांवों के कुल 14 लाख 27 हजार 358 लोगों की मलेरिया जांच की गई थी। इस अभियान के तहत सुदूर, दुर्गम पहाड़ों और वनों से घिरे पहुंच विहीन गांवों में मलेरिया जांच के साथ विभिन्न बीमारियों का इलाज और निशुल्क दवाई वितरण किया गया था। अभियान के दौरान कई गांवों में बरसों बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची थी।

सर्वाधिक प्रभावित बस्तर में भी कम हुई

छत्तीसगढ़ के महामारी नियंत्रण के संचालक डॉ। सुभाष मिश्रा कहते हैं कि एनुअल पैरासाइट्स इंसीडेंस के ताज़ा आंकड़े हमारे लिए काफी उम्मीद भरे हैं। कभी मलेरिया के सबसे उच्च दर वाले राज्यों में शुमार छत्तीसगढ़ में अब यह 1.17 रह गया है। बस्तर संभाग सबसे अधिक प्रभावित रहा है लेकिन वहां भी काफी कमी देखने को मिली है। उस क्षेत्र की अपनी कठिनाइयों हैं। उसके बाद भी वहाँ मलेरिया मुक्त अभियान के तहत लगातार काम हो रहा है।

कैसे बनती है यह रिपोर्ट

केंद्र सरकार की एजेंसियां ​​हर साल 1 जनवरी से 31 दिसंबर के बीच मलेरिया पॉजिटिव रिपोर्ट के आधार पर यह रिपोर्ट बनाती हैं। इसके लिए कुल पॉजिटिव मामले को एक हजार से बहु कर प्रदेश की कुल आबादी से भाग दिया जाता है। इससे प्रत्येक एक हजार की आबादी में बीमारों की औसत संख्या का पता चलता है।

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