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बढ़ेगा कर्ज का बोझ: छत्तीसगढ़ सरकार पर 70 हजार करोड़ का कर्ज, किसानों को भुगतान के लिए नई कर्ज लेने की तैयारी

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रायपुर17 मिनट पहले

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कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविंद्र चौबे राज्य सामान के प्रवक्ता हैं। उन्होंने कर्ज की स्थितियां बनने के लिए केंद्र सरकार के असहयोग को जिम्मेदार ठहराया है।

  • केंद्र से नहीं मिल रहा है 21 हजार करोड़ कर भाग का बकाया है
  • किसान न्याय योजना की चौथी किश्त और दूसरे खर्चों की जरूरत है

छत्तीसगढ़ सरकार का वित्तीय संकट कम होता नहीं दिख रहा है। इससे सामना करने के लिए सरकार नए कर्ज लेने की तैयारी कर रही है। सरकार पर पहले से ही 70 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया है। प्रदेश के कृषि, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री रविंद्र चौबे ने आज कहा, यह तो प्रदेश की वित्तीय स्थिति है। केंद्र सरकार ने हमारा 21 हजार करोड़ रुपये नहीं दिया और किसानों के धान का पैसा हमको देना है तो कहीं से तो व्यवस्थाजाम करना पड़ेगा। रविंद्र चौबे ने कहा, इसी महीने में राजीव गांधी किसान न्याय योजना की चौथी किश्त का पैसा भी देना है। उसकी तारीख तय है। मुख्यमंत्री जब असम के दौरे से लौटेंगे तो किसानों के खाते में चौथे किश्त जारी की जाएगी। उन्होंने कहा, ये सब कामों के लिए पैसे की आवश्यकता पड़ेगी तो हो सकता है कि हमें कर्ज लेना पड़े।

राज्य सरकार ने इस साल जनवरी महीने में ही 2759 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इसको मिलाकर सरकार पर कुल कर्ज 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक का हो गया है। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया था, दिसंबर 2018 में जब कांग्रेस की सरकार ने सत्ता संभाला। तब सरकार पर 41 हजार 239 करोड़ का कर्ज था। बीते दो वर्षों में 36 हजार 170 करोड़ रुपये का नया कर्ज जुड़ गया। इस राशि के प्रबंधन के लिए पिछले बार 5996 करोड़ कर्ज का ब्याज भरने के लिए और 4841 करोड़ रुपए की मूलधन की राशि चार्ज करने के लिए बजटीय व्यवस्था करनी पड़ी थी।

केंद्र सरकार को जिम्मेदार बताया

ऐसी स्थिति बनने के लिए राज्य सरकार केंद्र को जिम्मेदार ठहरा रही है। कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा, केंद्र सरकार ने प्रदेश का 21 हजार करोड़ रुपया अपने पास रोक रखा है। यह राशि समय से मिलती है तो कर्ज लेने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार की मानसिकता ही छत्तीसगढ़ को पैसे देने से रोकने का है।

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